नमन मंच 🙏🙏🙏
#हिंददेश परिवार पटना इकाई
दिनांक - 08-14/06/2021
दिन- मंगलवार से सोमवार
विषय- जहाँ चाह वहाँ राह
विधा - गद्य - पद्य( छंदमुक्त कविता)
चाह ही राह दिखाती ,
मंजिल के समीप ले जाती,
कुछ पाने की चाहत,
हौंसले को बुलंद कर जाती,
मानव को मेहनती बनाती,
चाह मुश्किलों से न घबराने देती,
राही को आगे बढ़ने का उत्साह भरती,
चाह बिना इंसान न जी पाता,
ऐसे ही अमूल्य जीवन को व्यर्थ गंवाता,
चाह को जीवन का सारथी बनाएं,
मंजिल पाने को जीवन जीने लक्ष्य बताएं ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर
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