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बुधवार, 9 जून 2021

जहाँ चाह वहाँ राह

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार पटना इकाई

दिनांक - 08-14/06/2021

दिन- मंगलवार से सोमवार

 विषय- जहाँ चाह वहाँ राह

विधा - गद्य - पद्य( छंदमुक्त कविता) 

चाह ही राह दिखाती , 

मंजिल के समीप ले जाती, 

कुछ पाने की चाहत, 

हौंसले को बुलंद कर जाती, 

मानव को मेहनती बनाती, 

चाह मुश्किलों से न घबराने देती, 

राही को आगे बढ़ने का उत्साह भरती, 

चाह बिना इंसान न जी पाता, 

ऐसे ही अमूल्य जीवन को व्यर्थ गंवाता, 

चाह को जीवन का सारथी बनाएं, 

मंजिल पाने को जीवन जीने लक्ष्य बताएं । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर


 



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