नमन मंच 🙏🙏🙏🙏🙏🙏
#साहित्य संगम संस्थान गुजरात इकाई
दिनांक - 10/06/2021
दिन - बृहस्पतिवार
विषय - तस्वीर
विधा - स्वैच्छिक ( छंदमुक्त कविता)
तेरी तस्वीर को आंखों में बसाये रखता हूँ,
तेरी यादों में हमेशा खोया रहता हूँ,
तूं मेरी तकदीर बदल दे मलिक,
तेरी तस्वीर को सीने से लगाये रखता हूँ,
तस्वीर तेरी मेरे नयनों की प्यास बुझाती है,
तेरे पास होने का मधुर अहसास कराती है,
तेरा प्यार मेरी जिंद जान में बस गया है,
तूं मेरे जीने का सहारा बन गया है,
तेरी तस्वीर को हमेशा निहारता हूँ,
तेरे प्यार पाने के लिए तरसता हूँ,
तेरी तस्वीर तेरे पास होने का अहसास कराती है,
तेरे लिए मेरे प्यार को और बढ़ाती है ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू , जम्मू कश्मीर
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