नमन मंच 🙏🙏🙏
#नव साहित्य परिवार
दिनांक - 10-12/06/2021
दिन - बृहस्पतिवार से शनिवार
विषय - बुढ़ापे का जीवन कैसा
विधा - स्वैच्छिक
बुढापा सबको आता है,
फिर क्यों रोता पछताता,
अपने कर्म बहुत याद आते,
दुख के बादल बढ़ते जाते ,
दुख दर्द और बढ़ाते,
माँ बाप आशीष वो पाता,
जो अपना पूरा कर्तव्य निभाता,
माँ बाप की सेवा हृदय से करता,
ईश्वर उसके सब दुख हरता,
माता पिता की सेवा स्वर्ग पहुँचाती,
जीवन में खुशियाँ बढ़ती जाती ,
माँ बाप को जो बोझ समझता ,
उसका जीवन भी दुखों से भरता,
माँ बाप के प्रति अपने कर्तव्य निभाएं,
बच्चों को मां बाप की सेवा का संस्कार सिखाएं ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू , जम्मू कश्मीर
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