# नमन मंच 🙏🙏🙏
# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत
# दिनांक 04/06/2021
# दिन - बुधवार
# विषय - कुछ मत कहिए
# विधा - स्वैच्छिक
लाशों का ढेर लगा ,
चीखें ही चीखें चारों ओर,
सुनने वाला कोई नहीं,
कुछ मत कहिए।
गरीबी का कैसा दौर आया,
सबको इसने बहुत रुलाया,
भूख से रोते सारे,
बेरोजगारी का भयानक समय आया,
सुनने वाला कोई नहीं,
कुछ मत कहिए।
मरीज अस्पताल जाने से डरते,
कमियाँ ही कमियाँ नज़र आती,
मरीजों को यम का द्वार दिखाती,
घर परिवार को बहुत रुलाती,
कोरोना ने भयंकर कोहराम मचाया,
सबको बर्बादी की दहलीज तक पहुँचाया,
सुनने वाला कोई नहीं,
कुछ मत कहिए।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू , जम्मू कश्मीरौ़ॽ
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