नमन मंच 🙏🙏🙏🙏🙏🙏
#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत
दिनांक - 20/06/2021
दिन- रविवार
#विषय - बिखरता परिवार एवं सिमटता प्यार
विधा - स्वैच्छिक ( छंदमुक्त कविता)
प्यार दिलों से घटता जाता,
एक दूसरे से मिलकर रहना अब नहीं भाता,
बड़ो से सलाह मशवरा कोई नहीं लेता ,
सिमटती जा रही है रिश्तों की रेखा,
सत्कार प्यार दुलार अपनापन खोता जाता,
जीवन में आने वाले कठिनाइयों से घबराता,
अकेले रहने की रीति किसने चलाई,
परिवार में दरारें बढ़ती जाती,
अहं भाव हावी होता जाता,
दिलों में दूरी बढ़ाता,
मैं मेरी से सब कुछ बिखरता जाता,
एक दूसरे से दूर ले जाता,
भावना से भावना को मिलाना,
परिवार में विश्वास बढ़ाता ,
दिलों से दूरियाँ घटाता है,
प्रेम भावना बढ़ाता है ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू , जम्मू कश्मीर
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