नमन मंच 🙏🙏🙏
#नव साहित्य परिवार
दिनांक - 15/06/2021
दिन- बुधवार
विषय -गुरू बिन ज्ञान कहाँ
विधा - स्वैच्छिक
गुरू ही संसार का ज्ञान कराता,
अच्छे बुरे की परख बतलाता,
जीवन जीने की कला हमें सिखाते,
मुश्किल राहों को आसान बनाते,
गुरु परमेश्वर का पूर्ण स्वरूप,
सबसे सुंदर लगता उसका रूप,
हर मुश्किल में देता सहारा,
लगता हमको प्राणों से प्यारा,
अनहद शब्द का देता ज्ञान,
सहज धुन में लग जाता ध्यान,
शुभ कर्मों की सीख सिखाता,
बुरे कर्म करने से हमेशा बचाता,
गुरु की वाणी अमृत समान,
नित करता मन आत्म स्नान,
गुरु की वाणी भ्रम मिटाती ,
ईश्वर का दर्शन कण कण में कराती,
गुरु बिन अधूरा सारा संसार ,
कोई न होगा भवसागर पार ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू , जम्मू कश्मीर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें