# नमन मंच 🙏🙏🙏
# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत
# दिनांक - 10/05/2021
# दिन - सोमवार
# विषय - पृथ्वी की वेदना
# विधा - स्वैच्छिक
पृथ्वी माता की वेदना बढ़ती जाती,
इंसान को दुखी देखकर बहुत घबराती,
माँ संतान की भूलों को नजरअंदाज करती,
भविष्य में आने वाली मुश्किलों से अवगत कराती,
माँ का आंचल सब दुखों से बचाता,
माँ के सानिध्य में जीवन सुखों से भर जाता,
पेड़ पौधे से सजी धरती माता सुंदर लगती,
पेड़ पौधों की अहमियत अपनी संतान को समझाती,
इंसान ने धरती माँ की सीख भुलाई,
अपनी मनमानी करके धरती माँ की वेदना बढ़ाई,
धरती माता की वेदना कम करने का उपाय अपनाये,
सभी अपने आस पास को पुनः पेड़ पौधों से सजाये।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर
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