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मंगलवार, 25 मई 2021

उम्मीद

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# दिनांक - 26/05/2021

# दिन - सोमवार से बुधवार

# विषय- उम्मीद

# विधा - स्वैच्छिक 

शहनाज़ ने अपनी पूरी जिंदगी बच्चों के लालन पालन और उनको शिक्षा देने के लिए समर्पित कर दी  ।पति चारपाई पर बीमार पड़ा  है। शहनाज़ की दो बेटियां है रूबिया और सुलताना, पति की दवाई का खर्च, बेटियों की पढ़ाई का खर्च, यह सब शहनाज़ को अकेले ही करना पड़ता है वो दो तीन घरों में झाड़ू लगाने और बर्तन धोने का काम करने लगी । 

शहनाज़ को उम्मीद थी उसकी मेहनत कभी बेकार नहीं जाएगी। उसकी बेटियां पढ़ लिखकर उसका नाम रोशन करेंगी ,उसकी यही उम्मीद उसे मजबूत बनाती थी जिस कारण उसका आत्मविश्वास कभी डिगा नहीं । 

रूबिया और सुलताना ने मां की उम्मीद को कभी टूटने नहीं दिया। दोनों बहनों ने मन लगाकर पढाई की और उनकी मेहनत रंग लाई दोनों ने बारहवीं कक्षा में पूरे राज्य में बार्षिक परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल किया । दोनों बहनों को सरकारी खर्चे पर इंजीनियर की सीट मिल गयी । 

अब माँ की उम्मीद  आकाश की उड़ान भरने लगी। अब शहनाज़ ने लोगों के घर में काम करना बंद कर दिया। अब उसकी बेटियां छोटे बच्चों को टूय्शन पढ़ाकर घर खर्चा चला लेती थी। रूबिया और सुलताना को इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद निजी कंपनी में साफटवेयर इंजीनियर की नौकरी मिल गयी। 

शहनाज़ की उम्मीद ने ही उसकी बेटियों को सफलता के मुकाम पर पहुँचाया । इसलिए हमें भी मुश्किल से मुश्किल समय में उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिए। 


 स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर


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