# नमन मंच 🙏🙏🙏
#नव साहित्य परिवार
# दिनांक -12/05/2021
# दिन - बुधवार
# विषय - खामोशी
# विधा - स्वैच्छिक
जीवन में खामोशी कैसी आई,
सब ओर मातम का संदेश लाई,
सब खामोश और चुपचाप बैठे,
सोचें सोच कर परेशान से,
जीवन में आई नई हलचल से,
जीना ही भूल गए,
अपनों खोने का गम,
जो होता न कम,
खामोशी ही खामोशी पसर रही,
खुशियों ने लगता हैं दूरी ही बना ली,
खामोशी में ही आंसू बहाते हृदय को पीड़ा देते,
खुद ही खामोशी में खो जाते,
कोरोना ने खामोशी को सब ओर फैलाया,
जीवन को ही खामोश करता आगे बढ़ता चला जा रहा।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर
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