फ़ॉलोअर

बुधवार, 5 मई 2021

संत कबीरदास का समाजवाद

  नमन मंच 🙏🙏🙏

रूहानी उपदेश साहित्यिक संस्थान जम्मू कश्मीर

# विषय - संत शिरोमणि सद्गुरु कबीर साहेब जी

# विधा - स्वैच्छिक

कबीरदास जी को भकि्तकाल का प्रवर्तक कहा जाता हैं। उनके दोहें  गागर में सागर भरें हुए है । उनके समय समाज वर्णो, धर्मो में विभाजित था जात -पात, छुआछूत का बोलबाला था। धर्म के नाम पर लोगों को लूटा जा रहा था जात पात के नाम पर लोगों को ज्ञान से दूर रखा जा रहा था। ईश्वर का डर दिखाकर लोगों को लूटा जा रहा था। 

कबीर जी ने समाज फैली कुरीतियों के लिए अपनी वाणी के माध्यम से आवाज उठाई ,और धार्मिक आडंबरों का पर्दाफाश किया, लोगों को एक ईश्वर के साथ जोड़ा । कबीरदास के जीवन काल में ही मुस्लिम प्रशासकों का आगमन हो गया था । लोग धर्म के नाम पर लड़ झगड़ रह थे । 

हिन्दू धर्म वाले कहते थे हमारा राम बड़ा है, और मुसलमान कहते थे हमारा खुदा बड़ा है। दोनों धर्मों के लोग एक दूसरे दुश्मन बन गए थे। कबीर जी ने अपनी वाणी के माध्यम से दोनों को समझाया कि राम और अल्लाह एक है एक ही ईश्वर के दो नाम है । 

उन्होंने अपने जीवन काल में सब धर्मों को एक करने का यत्न किया। सबसे प्रेम करने का पाठ सिखाया और सबको एक ईश्वर की संतान बताया है। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर














कोई टिप्पणी नहीं:

प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...