# नमन मंच 🙏🙏🙏
#नव साहित्य परिवार
# दिनांक -19-21/05/2021
# दिन - बुधवार से शुक्रवार
# विषय - सेवा धर्म
# विधा - स्वैच्छिक
सेवा का कर्म ही श्रेष्ठ,
इससे प्रसन्न होते सब देवी देवता,
मानवता की सेवा ईश्वर की सेवा कहलाती,
मनुष्य को पल में देवता बनाती,
ऊंच नीच का भेद मिट जाता,
जब मनुष्य दिल से सेवा कमाता,
दीन दुखियों का बनता सहारा,
उस मनुष्य का यश गाता सारा संसार,
अपने कर्म महान बनाता,
मानवता के काम जो आता,
सेवा ही मनुष्य को मनुष्य होने का अहसास कराती,
इंसानियत के गुणों से ओतप्रोत कर जाती ,
सेवा को ही परम धर्म बनाये,
अपने जीवन को सफल बनाये।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू , जम्मू कश्मीर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें