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गुरुवार, 6 मई 2021

जुल्म

 # नमन मंच🙏🙏🙏 

# साहित्य बोध असम इकाई

# दिनांक- 07/05/2021

# दिन- शुक्रवार

#विषय- जुल्म

#विधा - स्वैच्छिक

जुल्म न कमाओ लोगों, 

एक दिन मालिक को हिसाब देना है , 

सब तुम्हारे अपने  पराया कोई नहीं है, 

हर एक से प्यार बांटो , 

मिलता सुख बहुत है, 

जुल्म तो जुल्मी कमाते हैं, 

तुम तो संतान एक ईश्वर की हो, 

जुल्म का अंत बड़ा बुरा होता है, 

जुल्मी को हजारों बरस कोसा और धिक्कार जाता, 

ऐसा कर्म न कमाओ , 

इंसान से शैतान कहलाओ, 

अपने अस्तित्व को पहचानो , 

तुम तो देवता बनने आये हो, 

जुल्म ने किसी को न आज तक महान बनाया, 

जुल्म करने वाले ने अपने जीवन को हमेशा नर्क बनाया , 

जुल्म का रास्ता छोड़कर तुम इंसान बन जाओ, 

न्याय का साथ देकर सच्चे इंसान बन जाओ


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



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