नमन मंच 🙏🙏🙏
#काव्य प्रभा
(अखिल भारतीय साहित्यिक मँच)
चित्राभिव्यक्तिक्रमांक 02
शीर्षक ओ मेरे हमसफर
विधा कविता
दिनाँक 8/6/2021
दिन मंगलवार
मैंने तुमको ईश्वर की कृपा से पाया,
तूं बन गया मेरा हमसाया,
तेरा साथ मेरे सब दुख मिटाता ,
तेरे बिना मै एक कदम चल नहीं पाता,
तेरे मीठे मीठे बोल देते हैं मुझ को सरूर,
मेरे प्यारे हमसफ़र तूं ही है मेरा गरूर,
सुख दुःख में तूने मेरा खूब साथ निभाया,
समाज में मेरा बहुत मान सम्मान बढ़ाया ,
कई जन्मों का हमारा नाता,
एक पल भी जादुई मुझे नहीं भाता ,
हमेशा बना रहे हमारा साथ,
कभी न छोड़ना मेरा हाथ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू , जम्मू कश्मीर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें