# नमन मंच 🙏🙏🙏
#हिंददेश परिवार अमेरिका इकाई
# दिनांक -23/05/2021
# दिन - शुक्रवार से रविवार
# विषय- सुपथ गामी बनों, प्रेरणादायक रचनाएँ, सावधानी परक कविताएँ
#शीर्षक- बुलंद हौंसलें
# विधा - मुक्त (लघुकथा)
विवेक जीवन कठिनाइयों से भरा हुआ था । बचपन में पिता का साया छिन गया ,लेकिन उसकी माँ रेखा ने हिम्मत नहीं हारी। अपने बच्चों को उच्च शिक्षा देने के लिए दिन रात मेहनत करने लगी । बेटी निर्मला का विवाह भी कर दिया । बेटी ने विवाह के बाद भी अपनी पढाई को निंरतर जारी रखा उसे यह हौसला अपनी माँ से मिला था ।
अब घर में दो ही सदस्य रह गए थे विवेक और उसकी माँ रेखा। अब रेखा कुछ बीमार रहने लगी थी घर की सारी जिम्मेदारियां विवेक के कंधों पर आ गई । माँ की दवाईयों का खर्चा, घर में राशन लाना, ऊपर से उसकी अपनी पढाई का खर्चा उसे यह सब अकेले ही करना था । उसने दिन में माँ की सेवा करनी और रात किसी के घर में चौकीदार की नौकरी करने लगा । उसने बी.ए का एडमिशन एक मुक्त महाविद्यालय में ले लिया । उसने घर की जिम्मेदारी को खूब अच्छे तरीके से निभाया और अपनी पढ़ाई भी ध्यान से करने लगा।
उसकी मेहनत रंग लाई उसकी माँ की तबियत में भी सुधार होने लगा। उसने बी.ए. की डिग्री भी अच्छे अंक से उतीर्ण कर ली। अब उसे एक अच्छे बैंक में नौकरी भी मिल गई । विवेक की बड़ी बहन निर्मला को भी सरकारी विद्यालय में अध्यापक के पद पर नौकरी मिल गई
यह सब संभव हो पाया उनके बुंलद हौसलों से अगर उनकी माँ भी बाकी औरत की तरह पति की मृत्यु के बाद हिम्मत हार जाती तो उसके बच्चे भी बाकी बच्चों की तरह ही गरीबी में ही जीवन व्यतीत करते विवेक ने भी मां की बीमारी का बहाना बनाकर अपने उद्देश्य को नहीं छोड़ा बल्कि अपने हौंसलों को बुलंद रखा और अपनी मंजिल को हासिल किया।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू , जम्मू कश्मीर
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