# नमन मंच 🙏🙏🙏
#नव साहित्य परिवार
# दिनांक -14/05/2021
# दिन - शुक्रवार
# विषय - जमीर, ख्वाब कामयाबी
# विधा - स्वैच्छिक
जमीर बेचकर ख्वाब पूरा किया,
लेकिन कामयाबी कांटों सी लगती,
मन तो भुलाने के यत्न करता,
जमीर की आवाज के सामने हार जाता,
जमीर का सौदा कर ,
कामयाबी मैंने पाई,
ख्वाबों में भी नींद चैन की गंवाई,
जमीर बेचकर कभी ,
कामयाबी न पाना,
दुख हार से ज्यादा कामयाबी देगी,
अगर इंसान तेरी इंसानियत ही मर गई होगी,
अंतर की आवाज को न कभी दबने देना,
ईमानदारी की हार जीवन में अपार सुख देगी ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू ,जम्मू कश्मीर
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