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शनिवार, 28 जून 2025

मन अब रहता सदा उदास

 मन अब रहता सदा उदास ,

खो गया कही दुनियाभर का झूठा उल्लास ।

जब हुआ अपने अवगुणों का अहसास, 

जाग गया मन में सतगुर पर विश्वास ।




स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह

 जम्मू-कश्मीर 

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