पिता दशमेश अद्भुत तेरे लालों की कुर्बानी
इस जहान तेरा नहीं कोई सानी
रखी न अपने पास कोई निशानी
तेरा जैसा कोई न बडा दानी ।।
दो लाल ने दी चमकौर गढ़ी में कुर्बानी
अपनी वीरता शौर्यता से जालिमों को याद करवा दी उनकी नानी
गुरु तेग बहादुर के पोते भी बलिदानी
मानव सेवा ही साहिबजादों ने बड़ी मानी।।
छोटे साहिबजादों को देखकर बजीर खान को हुई हैरानी
धर्म पर अडिग रहने की शक्ति उसने जानी
सरबस दानी पिता के पुत्र दे गए प्राणों की कुर्बानी
सृष्टि का कण कण गाता उनकी वीरता की अमर कहानी।।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा, जम्मू-कश्मीर
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