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मंगलवार, 14 जनवरी 2025

मकर सक्रांति

 मकर सक्रांति का इतिहास

आनंदपुर किले को मुगल , पहाड़ी राजाओं ने घेरा 

भारी विपत्ति में भी न गिरा सकी,  बुलंद हौसला सतगुर तेरा।

घेराव के कारण खान पान में कमी बेशक आई 

चालीस सिखों ने दशमेश पिता को पीठ क्यों दिखाई ।

गुरू साहिब ने ललकार के कहा 

छोड़कर जाना चाहते हो बेशक जाओ।

बेदावा लिखकर जाना होगा

हमारा नही है गुरू से कोई नाता  ।

चालीस सिख ने बेदावा लिखकर भागना समझ सही 

घरवालों ने लानते मारी बहुत करारी , आंसुओ की धारा अब उनके दिल से बही ।

चालीस सिखों ने पुन: अब वापिस की कर ली तैयारी 

चालीस ने मुगलों से ली टक्कर भारी ।

अपनी जान सब ने धर्म की खातिर बारी 

नमस्कार करती है आज उनको दुनिया सारी।

महासिंह के शरीर में थे प्राण बाकी 

सतगुर से अपनी भूलों की क्षमा मांगी।

सतगुर ने बदावा फाड़कर पुन: उनको  जोड़ लिया

सतगुर ने सब के  संसारिक बंधनो को क्षण मे तोड़ दिया।

स्वरचित  एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला - सांबा,  जम्मू-कश्मीर 




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