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शनिवार, 25 अक्टूबर 2025

मन की दुविधा में

 मन की दुविधा में, खोया अपना चैन, 

 मन की किताब पढने में, बीतते है दिन रैण ।

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

सांबा,  जम्मू-कश्मीर 

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