नमन मंच 🙏🙏🙏
क़लम की ताक़त साहित्यिक संस्थान ,भारत
दिनांक - 06/10/2021
दिन - शनिवार
विषय - मन का अंधकार कैसे मिटाये
विधा - स्वैच्छिक
मन का अंधेरा ज्ञान से जाता, अंतर में ही तीर्थ पाता,
सबको यही भ्रम भुलाता, बाहरी दृष्टि से ईश्वर को देख नहीं पाता ।
हे प्रभु मुझे मार्ग दिखलाओ, मेरे मन अंतर की वेदना मिटाओ
मुझसे मेरे निज रूप का, साक्षात्कार तुम स्वयं कराओ ।
मै मेरी का परदा पड़ा मन में , झमेला बना जीवन में,
अपनी महर का अहसास करा ह्रदय में, दया की बर्षा बरसा निर्जल मन में ।
गुरु का मेल कर दे, मन के भ्रम भुला दे,
तेरे अंग संग होने का, प्रियतम मुझे यकीन दिला दे ।
अज्ञानता मन का अंधियारा, गुरु बिना दिखता नहीं कण कण में बसने वाला,
गुरुपरमेश्वर ने माया का परदा हटाया, सर्वव्यापी वाहिगुरू का अंतर में दर्शन कराया।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें