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शनिवार, 2 जुलाई 2022

जिंदगी एक समझौता

 शीर्षक - जिंदगी एक समझौता 

जिंदगी एक समझौता बनकर रह गई

जज्बातों को दबाते रहने की कहानी कह गई 

हर रिश्ता जिंदगी में समझौतों पर टिका है

हर भाव अंदर ही अंदर छिपा है ।।

दिखावा करते करते प्यार की भावना कहीं खो गई 

लगता हमारी आत्मा भी कहीं जाकर सो गई 

हर रिश्ता अब बेगाना सा लगता है 

अब हंसना भी रोना जैसा लगता है ।।

जिंदगी के समझौते जीने का राह बनाते हैं

कभी पराये भी अपने होने का एहसास कराते हैं

जिंदगी का सफर ऐसे ही हमेशा से चलता आया है

सबने जीवन जीने के लिए समझौतों का राह अपनाया है।।

सुख दुख भी जिंदगी का हिस्सा बन‌ जाते हैं

इंसान को हंसाते रुलाते हैं

अपनों का संसार में आना जाना जिंदगी में बदलाव लाता है

इंसान को खुशी ग़म का एहसास कराता है।।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा जम्मू कश्मीर 





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