शीर्षक - श्याम तेरी बंसी
श्याम तेरी बंसी की तान
डाल देती है मुर्दे में जान
रूहानियत से भर जाता रोम रोम
मन भी हो जाता है मौन।।
श्याम तेरी बंसी अज्ञान मिटाती
सोयी हुई आत्मा को जगाती
जन्मों जन्मों की हृदय से मैल हट जाती
गंगा जैसा निर्मल मन को बनाती।।
श्याम तेरी बंसी की अद्भुत है तान
सुनकर पापी भी बन जाता महान
श्याम तेरी बंसी की तान में सबके बसते हैं प्राण
तूने ही किया सबको प्रेम का दान ।।
व्याकुल रहते मेरे कान सुनने को श्याम तेरी बंसी की तान
कैसे करते हो तुम इतना मधुर गान
मेरे श्याम तेरी बंसी की तान लगाती है ईश्वर में ध्यान
इंसान पहुंच जाता ईश्वर के धाम ऐसी मीठी है तेरी बंसी की तान ।।
श्याम तेरी बंसी की तान भूल देती दुख दर्दों का नाम
यही लगती है मुक्ति का धाम
संसार का कण कण तेरी बंसी की महिमा को गाता
बंसी की तान सुनकर तेरा मेरा करना भूल जाता।।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा,जम्मू कश्मीर
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