शीर्षक - कहीं किसी मोड़ पर
कहीं किसी मोड़ पर मेरी जिंदगी से हो गई बात
आधे अधूरे सपने वादे पूरे करने की याद आ गई बात।।
हर कसम हर रिश्ते को शिद्दत से निभाते रहने इकरार हो गया
मुझे लगता है जिंदगी से मेरा आज सही में मेल हो गया।।
कहीं किसी मोड़ पर जिंदगी ने अहसास करा दिया
अपने पराये का भाव हृदय से जड़ से मिटा दिया।।
जिंदगी का हर मोड़ नई सीख सिखाता नजर आता है
मनुष्य को जीवन के अलग अलग अनुभव कराता है।।
हर सपने को पूरा करने का अवसर देती जिंदगी
कोशिश, मेहनत से जिंदगी भी लगती है बंदगी ।।
कहीं किसी मोड़ पर मुझे जिंदगी का सही अर्थ समझ आया
जिसने मुझे जिंदगी को खुशहाल बनाने का मंत्र है समझाया।।
जिंदगी वहीं सफल जिसने परोपकार है कमाया
जिसने दुखी , असहाय को अपने गले है लगाया।।
जिंदगी का हर मोड़ पल में बीत जाता
नासमझ सिर्फ हाथ मलता रह जाता
चलो जिंदगी को खुशनुमा, खुशनसीब बनाते हैं
श्वास श्वास से हरि के गुण गाते है ।।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा, जम्मू कश्मीर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें