शीर्षक - मन के विकारों को मिटाना है
मन के विकारों को मिटाना है
अंतर मन में ही हरि को पाना है
मन वचन कर्म से गुरु मार्ग पर चलते जाना है
गुरु के हुक्म में रहना मन को सिखाना है।
कर्मों को निष्काम भाव से करते जाना है
फल को पाने की इच्छा को भुलाना है
सबको प्रेम से अपना बनाना है
द्वैत भाव को मन से दूर भगाना है।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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