शीर्षक - मोहपाश
धीरज बहुत ही मेहनती लड़का था उसने बहुत परिश्रम करके सरकारी नौकरी प्राप्त की। परिवार में सिर्फ वो तीन ही सदस्य थे। धीरज स्वभाव से बहुत ही भोलाभाला था । घर और नौकरी के सिवाय उसे कुछ भी सुझता नहीं था।
धीरज की दोस्ती अपने साथ काम करने वाले वाली अनिता से हो गई। अनिता चकाचौंध भरे जीवन जीने में विश्वास करती थी। धीरज अब अनिता से प्यार करने लगा । एक दिन धीरज ने अपने दिल की बात अनिता से कह दी। अनिता ने कहा मैं तुमसे शादी करने के लिए तैयार हूं लेकिन तुम्हें मेरे अनुसार ही जीवन जीना होगा, धीरज ने बिना सोचे समझे हां कर दी।
अब दोनों एक साथ घूमने फिरने जाने लगें। एक दूसरे से रात भर मोबाइल पर बातें करते रहते। एक दूसरे को मिलने के बेकरार रहते। जैसे दोनों एक दूसरे को कई जन्मों से जानते हो। धीरज अनिता के मोहपाश में बंधता जा रहा था।
कुछ महीनों के बाद दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद अनिता ने अपने असली रंग दिखाने शुरू किए। उसके मन में धीरज के माता पिता के लिए थोड़ा सा सम्मान भी नहीं था। अब धीरज थोड़ा परेशान रहने लगा। उसने अनिता को बहुत समझाने का प्रयास किया लेकिन अनिता के कान पर जूं तक नहीं रेंगती थी।अब दोनों में लड़ाई झगडे बढ़ने लगें एक दूसरे को उलहाना देना दोनों की आदत बन गई।
अब धीरज को अपनी ग़लती का अहसास होने लगा कि मैंने अनिता के मोहपाश में फंसकर बिना सोचे समझे इससे शादी क्यों कर ली ? उसे अपनी गलती पर अफसोस होने लगा लेकिन वो समय बीत चुका था।
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