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बुधवार, 1 जून 2022

सबसे बड़ा रुपैया

 शीर्षक - सबसे बड़ा रुपैया 

हर रिश्ते की बुनियाद पैसा बन‌ गया 

प्रेम प्यार का नाता कहीं छिप गया 

एक दूसरे का दर्द अब रुलाता नहीं 

आंखों का पानी भी बर्फ सा जम गया 

इंसानियत का रिश्ता सब भूल गए

पैसे के रंग ही सब पर चढ़ गए 

पैसा कमाने के हर हथकंडे अपनाते है 

ज़मीर को भी बेचकर खा जाते हैं 

नशों के सौदागर कारोबार धड़ल्ले से चलाते हैं

बड़े बड़े कुर्सी वालों को रिश्वत देकर अपना कारोबार आगे बढ़ाते है 

नौजवानों को नशे का आदी बनाते हैं 

अपने घरों में पैसा भरते जाते हैं 

पैसा कमाने के लिए बड़े बड़े अधिकारी कुर्सी का फायदा उठाते हैं

गरीबों के हक की रोटी भी खुद खा जाते हैं

एक लाख नहीं करोड़ों अरबों रुपए नेता लोग बिना डकार के हजमाते है 

सबसे बड़ा रुपैया अपने दिल से ऐसे भ्रष्ट नेता मनाते हैं।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर



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