फ़ॉलोअर

शनिवार, 7 जून 2025

मौजूद हो तुम हर जगह

 मौजूद हो तुम हर जगह, ऐसा बास तुम्हारा, 

मैं मेरी फंसा इंसान , मोह माया का ऐसा घेरा।


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जिला सांबा ,जम्मू-कश्मीर 




कोई टिप्पणी नहीं:

साधु-संत का संग

 साधु-संत का संग ,मिटाता कोटि पाप  वचन मान भक्ति कर, मिट जाता आपा भाव