शीर्षक - मैं हिंदी भारत माता के माथे की बिंदी हूँ
मैं भारत का गौरव हूँ
मैं इसकी शान हूँ
हमेशा करती इसकी महिमा का गुणगान हूँ
मैं हिंदी भारत माता के माथे की बिंदी हूँ ।
मैं भारत के इतिहास अपने साथ लेकर चलती हूँ
वर्तमान में नव में इतिहास बनाती हूँ
भविष्य को भी भारतीय संस्कृति का गुणगान सुनाती हूँ
मैं हिंदी भारत माता के माथे की बिंदी हूँ ।
मेरी पहचान को मिटाने वाले अनेकों आएं हैं
मुहं की खाकर हमेशा पछताएँ है
मेरा अस्तित्व हमेशा से अमर है अब सबको समझ आया है
मैं हिंदी भारत माता के माथे की बिंदी हूँ।
संस्कृत भाषा को मैंने मां माना है
सब भाषा को गले लगाया है
किसी से भी मैंने सौतेला व्यवहार नहीं अपनाया है
मैं हिंदी भारत माता के माथे की बिंदी हूँ ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा , जम्मू कश्मीर
व
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