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रविवार, 9 जनवरी 2022

माता गुजरी का लाल

 शीर्षक - माता गुजरी का लाल

माता गुजरी का लाल बहुत प्यारा है

दीन दुखियों का बनता सहारा है

पीरों का पीर है फकीरों में फकीर हैं

ऐसा जलवा माँ गुजरी तेरे लाल का हर कोई उसका दीवाना है

हिंद की रक्षा के लिए पिता गुरु तेगबहादुर को वार  देना

ऐसा निस्वार्थ  दानी माँ गुजरी मैंने नहीं देखा

सबसे प्रेम करने वाला ,

पुत्रों से ज्यादा स्नेह अपने शिष्यो ं पर लुटाता है, 

ऐसा प्रेम पुरुष माँ गुजरी मैंने नहीं देखा है

अपने धर्म संस्कृति को बचाने के लिए 

अपने प्रिय पुत्रों की कुर्बानी देना वाला ऐसा त्यागी नहीं देखा है 

कवि में महाकवि, योद्धा में महायोद्धा, संत में महासंत

ऐसा निराला व्यक्तित्व सिर्फ माँ गुजरी तेरे लाल का देखा है। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर

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