शीर्षक - ऐ मेरे प्यारे वतन
मिट्टी जिसकी सोने जैसी
हर दिल में भगवान है
ऐ मेरे प्यारे वतन तूं मेरा अभिमान है........
दया जहाँ सबसे श्रेष्ठ गुण है
दूसरों के अवगुण सदा भूल जाना की सीख सिखाई जाती है
ऐ मेरे प्यारे वतन तूं मेरा अभिमान है............
नदियां मां की तरहां पूजी जाती है
अपने निर्मल जल से मैल तन मन की मिटाती है
ऐ मेरे प्यारे वतन तूं मेरा अभिमान है..........
जन जन मेरे देश का दयावान है
कण कण में इसके बसता भगवान है
ऐ मेरे प्यारे वतन तूं मेरा अभिमान है..........
किसान मिट्टी में इसकी में अन्न उगाता है
अन्नदाता सबका वो कहलाता हैं इतना मान सबसे पाता है
ऐ मेरे प्यारे वतन तूं मेरा अभिमान है..........
वीर सैनिक भारत मां की सेवा तन मन से करता है
देश की रक्षा की खातिर प्राण न्यौछावर करने से, पीछे कभी नहीं हटता है
ऐ मेरे प्यारे वतन तूं मेरा अभिमान है..........
मेरी भारत भूमि का कोना कोना तीर्थ स्थान है
इसकी पावन मिट्टी को नमस्तक होता सारा जहान है
ऐ मेरे प्यारे वतन तूं मेरा अभिमान है....................
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा , जम्मू कश्मीर
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