फ़ॉलोअर

सोमवार, 11 अप्रैल 2022

चले चल चलो अपने धाम

 शीर्षक- चले चल चलो अपने धाम

चले चल चलो अपने धाम ,

नश्वर दुनिया से हमारा क्या काम 

चले चल चलो अपने धाम..................... 

जो आंखों से दिखता है क्षण में मिट्टी में बदलता है 

नासमझ, मूर्ख तूं क्यों इसमें लिपटता है

चले चल चलो अपने धाम..................... 

चकाचौंध के चक्रव्यूह में फंसता जाता है

अपने अनमोल श्वास व्यर्थ गंवाता है 

चले चल चलो अपने धाम......... 

मैं मेरी का रटना का भारी पड़ेगा

अंत में कोई तेरे साथ न खडे़गा 

चल चले चलो अपने धाम.............. 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला सांबा जम्मू कश्मीर










कोई टिप्पणी नहीं:

प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...