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रविवार, 10 अप्रैल 2022

पुकार

 दिल की पुकार सुन ले मेरे साइयां 

तन में बजने लगी अब मौत शहनाइयां

गलतियों का मैं पुतला काल के जाल में फंसा हूं

विकारों की मैल मे ग्रस्त तन मन मेरा 

कोई दिखता नहीं तेरा जैसा दयालु

जो मुझ पापी पर रहम करे 

तन मन के दुख सब हरे 

मौत का डर मुझे बहुत सताता है 

कर्मों का लेखा जोखा देने से दिल घबराता है

 दिल की पुकार सुन ले मेरे स्वामी 

तन मन की तृष्णा बुझा दो बन जाऊं सुखगामी।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला -  सांबा, जम्मू कश्मीर

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