दिल की पुकार सुन ले मेरे साइयां
तन में बजने लगी अब मौत शहनाइयां
गलतियों का मैं पुतला काल के जाल में फंसा हूं
विकारों की मैल मे ग्रस्त तन मन मेरा
कोई दिखता नहीं तेरा जैसा दयालु
जो मुझ पापी पर रहम करे
तन मन के दुख सब हरे
मौत का डर मुझे बहुत सताता है
कर्मों का लेखा जोखा देने से दिल घबराता है
दिल की पुकार सुन ले मेरे स्वामी
तन मन की तृष्णा बुझा दो बन जाऊं सुखगामी।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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