शीर्षक - लेखनी
लेखनी जब जब चलती है
नया युग का आरंभ करती है
लोगों में जागृति लाती है
जीवन में आगे बढ़ने की हिम्मत बढ़ाती है
झूठ की पोल खोलकर सच्चाई सामने लाती है
लेखनी अपनी पहचान स्वयं बनाती है
लेखनी स्वतंत्र विचरती है
सच झूठ का निर्णय बिना पक्षपात के करती है
लेखनी ही साहित्यकार की पहचान बनाती है
समाज सुधारक की भूमिका खूब निभाती है।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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