शीर्षक - माता शबरी के राम
माता शबरी के राम बहुत प्यारे हैं
सबके काज प्रभु राम ने आप संवारे है
ऋषि मुनि जिनको श्वास श्वास ध्याते है
वो ही मेरे राम स्वयं चलकर माता शबरी के पास आते हैं
प्रभु राम माता शबरी के भाग्य जगाते हैं
उनकी सच्ची भक्ति का फल स्वयं देने आते हैं
माता शबरी के झूठे बेर प्रभु राम बड़े चाव से खाते हैं
अपनी सच्ची भक्त करने वालों पर अपना प्रेम लुटाते हैं।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला सांबा, जम्मू कश्मीर
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