# नमन मंच 🙏🙏🙏
# हिंददेश परिवार डिब्रूगढ़ इकाई
# दिनांक - 10/06/2021
# दिन - बृहस्पतिवार
# विषय - पवित्र हृदय उतम तीर्थ
# विधा - स्वैच्छिक( आलेख)
मनुष्य की पहचान विचार पर निर्भर करती है, उसके विचार सकारात्मक है या नकारात्मक । विचार का अच्छा या बुरा होना, हमारी संगति पर निर्भर पर करता है। हम अच्छे लोग की संगति में है या बुरे लोगों की संगति में। जिस तरह की संगति होगी उसी तरह का सीधा प्रभाव हमारे हृदय पर पड़ता है ।
हृदय को पवित्र करने का साधन है अच्छे लोगों की संगति, धार्मिक ग्रन्थों का अध्ययन , अच्छे विचारों को ग्रहण करना और बुरे विचारों का त्याग करना। सिमरन साधना से मन ध्यान में टिकता है और मन के इसी टिकाऊपन को सहज समाधि भी कहा जाता है ।
जब मन विकारों से रहित हो जाता है तब तीर्थ के समान पवित्र और पावन हो जाता है। इसके अंदर से मैं मेरी की भावना का नाश हो जाता है और तूं तेरी की भावना समाहित हो जाती है। ऐसी अवस्था में मनुष्य का हृदय तीर्थ के समान सब का कल्याण करने का कार्य करता है और लोककल्याण को ही जीवन का लक्ष्य मानता है । ऐसे हृदय से निकले शब्द काव्य का रूप धारण कर लेते हैं ,और लोककल्याण का कार्य करते हैं।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर, जम्मू
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