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सोमवार, 8 मार्च 2021

नारी है नारायणी

 नमन मंच 🙏 🙏🙏

#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 18/06/2021

दिन -शुक्रवार

विषय - महिला उत्थान के लिए

विधा - छंदमुक्त कविता 

नारी है नारायणी , 

हिम्मत जिसने कभी नहीं हारी । 

हर कष्ट को सह गयी

हर आंसू को पानी समझकर पी गयी । 

 अब भी वह झासी की रानी है, 

दास्ताँ नहीं पुरानी है । 

अपने हक के लिए लड़ जाएगी, 

जब खुद की आन पर बने , 

प्राण अपने न्यौछावर कर जाएगी। 

कमजोर न इसको कभी न समझना

तलवार उठाकर हर परिस्थिति से लड़ जाएगी। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू




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