नमन मंच 🙏 🙏🙏
#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत
दिनांक - 18/06/2021
दिन -शुक्रवार
विषय - महिला उत्थान के लिए
विधा - छंदमुक्त कविता
नारी है नारायणी ,
हिम्मत जिसने कभी नहीं हारी ।
हर कष्ट को सह गयी
हर आंसू को पानी समझकर पी गयी ।
अब भी वह झासी की रानी है,
दास्ताँ नहीं पुरानी है ।
अपने हक के लिए लड़ जाएगी,
जब खुद की आन पर बने ,
प्राण अपने न्यौछावर कर जाएगी।
कमजोर न इसको कभी न समझना
तलवार उठाकर हर परिस्थिति से लड़ जाएगी।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर ,जम्मू
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