# नमन मंच 🙏🙏🙏
# हिंदी साहित्य संगम संस्थान तमिलनाडु इकाई
# दिनांक - 09/03/2021
# दिन - मंगलवार
# विषय - तन्हाई
# विधा - कविता
तन्हाई मुझे लगती है विच्छु के डंक की तरह,
दर्द देती जलन देती बेइंतहा ।
इसका कोई ईलाज नहीं,
न कोई दवा,
जो इस रोग खत्म को कर दें ।
ये रूलाती है तड़पाती है,
जीवन को निढाल बनाती ।
हर पल आंसू सजाये बैठी है,
सिर्फ उन्हें बहाने का मौका ढूंढती है ।
तन्हाई ही कदर करना सिखाती है,
अपने हर रिश्ते की,
जिसे हमने नाकाम कर दिया।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर ,जम्मू
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