# नमन मंच 🙏🙏🙏
# हिंदी साहित्य संगम संस्थान तेलंगाना इकाई
# दिनांक - 12/03/2021
# दिन - शुक्रवार
# विषय - साइकिल
# विधा - कविता
चोरी चोरी पापा का,
साइकिल चलाता था
बडा़ मजा आता था
नित्य घूमने जाना
मुहं से गाना गुनगुना
साइकिल की सवारी का अलग है मजा
कोई नहीं होती थी चालान की सज़ा
दोस्तों के साथ साइकिल की रेस हूँ लगाता
जीतने पर मुफ़्त की कुल्फी हूँ खाता
मौज मस्ती का बढियां साधन है साइकिल
तेल के पैसे बचाता है साइकिल।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर, जम्मू
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