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मंगलवार, 2 मार्च 2021

नारी का अस्तित्व

# विषय - नारी का अस्तित्व

# विधा -  स्वैच्छिक( छंदमुक्त कविता) 

नारी संसार का आधार है

हर कुर्बानी के लिए हमेशा रहती तैयार है 

गिला शिक़वा कोई नहीं करती 

हर काम दिल से करती 

मुसीबत में परिवार को देती सहारा

हर कष्ट उसके आगे हारा

बच्चों को देती है अच्छे संस्कार

खुशहाल रहे सारा ससुराल

अपनी की इच्छाओं करती नहीं परवाह

हर सदस्य को देती है अच्छी सलाह

नारी बिना अधूरा है संसार

आगे नहीं बढे़गा किसी का परिवार। 

स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू







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