# नमन मंच 🙏🙏🙏
# हिंदी साहित्य संगम संस्थान तमिलनाडु इकाई
# दिनांक - ०४/०३/२०२१
# दिन - बृहस्पतिवार
# विषय - बदल गया इंसान
# विधा - पद्म ( छंदमुक्त कविता)
मैं मेरी की बढ़ गई भावना
पूरी करना चाहता है हर कामना
हर पल रखता अपना ही ध्यान
इतना बदल गया है इंसान ।
निंदा चुगली का उठाता भार
अपने अवगुणों को न करता याद
इन बातों से बढ़ता तनाव
इतना बदल गया है इंसान ।
दुख की छाया से घबराता
दोष दूसरो पर लगाता
हर परिवर्तन से रहता परेशान
इतना बदल गया है इंसान।
धर्म के नाम पर करता है दंगा फसाद
धर्म के मूल्यों की जाने न कोई बात
फैलाता है अज्ञान का अंधकार
इतना बदल गया है इंसान।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर, जम्मू
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