# विषय - जगत की प्रीत है झूठी
# विधा - गीत
जगत की प्रीत है झूठी
दुख इसका क्या मनाना है.....
सब मतलब के है रिश्ते
कौन अपना बेगाना है
जगत की प्रीत.............
दिल को पल में तोड़ जाते है
जो अपने कहलाते है
जगत की प्रीत...........
दुख किसको सुनाऊँ अपना
दूर सब भाग जाते हैं
जगत की प्रीत..........
आंखों के आंसुओं का मोल
जहाँ कौन लगाता है
जगत की प्रीत........
मरा हुआ ये
सबको क्यों रूलाता है
जगत की प्रीत.........
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर , जिला जम्मू
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