# नमन मंच 🙏🙏🙏
# साहित्य संगम संस्थान गुजरात इकाई
# दिनांक - 27/03/2021
# दिन - शनिवार
# विषय - बाल मन
# विधा - कविता
पक्षी की भांति उड़ता जाता
मन बहुत सपने बनाता
हर चीज में दिखता नयापन
हैरान हो जाते नयन
बात बात पर चिढ़ जाता
मन की बात कह नहीं पाता
हर किसी से चाहता प्यार
बारह जाने के लिए रहता बेकरार
सपनों की नींद में सोया रहता
अपने विचारों में, खोया नहीं थकता
बैर भाव का ना होता नाम
लगा रहता अपने काम
चिंता फिक्र न सताता
हर काम कल्पना से, बन जाता
बाल मन होता हरि धाम
जिसमें बसते प्रभु श्री राम।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर
मन
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