# विषय - माँ तेरे बहुत परोपकार
# विधा - छंदमुक्त कविता
माँ तेरे बहुत परोपकार,
गिनती करने लगूँ,
लग जाएंगे जन्म हज़ार ।
अमृत रूपी दुध तुम्हारा,
बनता प्रथम आहार,
तेरे से ही सीखते अच्छे संस्कार।
जीवन में पग- पग में देती सहारा,
तेरा बिना मुझे कुछ लगता नहीं प्यारा ।
तेरी ममतामयी छाया का प्रताप,
दुख जाते हैं क्षण में भाग ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह जम्मू कश्मीर ,जम्मू
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें