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रविवार, 7 मार्च 2021

हौंसले बुलंद हो

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# नव साहित्य परिवार

# दिनांक - ०७/०३/२०२१

# दिन - रविवार

# विषय - हौसले बुलंद हो

# विधा - छंदमुक्त कविता

हौंसले बुलंद हो

कंधों में जान हो

रोक कोई सकता नहीं

चलते तूफान को । 

आत्मविश्वास हो

श्रम ही कर्म हो

विघ्न कोई रोक सकता नहीं

नदी के बहाव को  । 

 परिश्रम का साथ हो

साहस अपार हो

रोड़ा कोई रोक सकता नहीं

चलते हुए राही को

हार जीत का न प्रश्न हो

कर्म करना ही धर्म हो

हर कोई मान लेता 

परिश्रम के प्रभाव को। 


स्वरचित एवं मौलिक

 अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू



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