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शुक्रवार, 5 मार्च 2021

बेरूखी

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान तेलंगाना इकाई

# दिनांक - ०५/०३/२०२१

# दिन - शुक्रवार

# विषय - बेरूखी

# विधा -  कविता

तेरी बेरूखी किस लिए पिया

मैने जान जिगर  तुझे दिया

मेरे सपनो का सार तूं ही

मेरे दिल की धड़कन तूं ही

मेरा हर अरमान तेरे लिए

तूं मेरी जिंद जान पिया 

खफ़ा क्या मुझ से हुई है

जो तो रूठा पिया

तेरी बेरूखी मेरे लिया सजा है

तेरे बिन जीने का क्या मजा है 

मुझे मेरी गलती तो बता पिया

बिना गलती के बेरूखी का विष न पिला पिया

बिना गलती के सज़ा मैंने पाई है

आंख रोई है आंसू बहाया

मुझे मै ही ऐसी कमी है पिया

तेरे दिल से बेरूखी उतर न पाई है। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर, जम्मू


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