# नमन मंच 🙏🙏🙏
# ग्वालियर साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच
# दिनांक - १३/०३/२०२१
# दिन - शनिवार
# विषय - जागरूकता
# विधा - लघुकथा
पुरानी रूढ़िवादी विचारधारा को बदलना आसान नहीं है । यह रूढ़िवादी विचारधारा मनुष्य के हृदय में धस बस गई। लड़की लड़का में भेदभाव आज भी किया जाता है।
रीना की बहू पेट से उसे अब रीना को यह चिंता सता रही है, बहू के पेट में पल रहा बच्चा लड़का है या लड़की। रीना बहू को डाक्टर के पास ले जाकर बच्चे की जांच करवाने के लिए मजबूर करती है लेकिन बहू किसी कीमत पर जांच नहीं करवाना चाहती।
अहिस्ता अहिस्ता यह बात पूरे घर में फैल गई है । सभी रीना को समझना शुरू किया, रीना की बड़ी बेटी सुनीता ने मां को समझाया कि माँ लड़की लड़के में कोई अंतर नहीं है लडकियाँ आज लड़कों के साथ कंध से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं।
माँ आप जानती नहीं हो बच्चे की गर्भ में लिंग जांच करवाना कानून जुर्म है इसके लिए सजा का भी प्रावधान है तब भी आप ऐसा करने जा रही हो ।
अब रीना सोच में पड़ गई और अपनी बहू से अपनी गलती की माफ़ी मांगने लगी । सुनीता ने अपनी सूझबूझ से मां की सोयी हुई सोच को जागृति किया और उसे सही रास्ता दिखाया।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर, जम्मू
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