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शुक्रवार, 5 मार्च 2021

जाने कहाँ गए वो दिन


#विषय - जाने कहाँ गए वो दिन

#विधा - छंदमुक्त कविता

बचपन में खाना पीना

बात बात पर रूठ जाना 

भाई बहन से छीन छीन के खाना

माता पिता का हमें मनाना

जाने कहाँ गए वो दिन। 

 पाठशाला में करनी मस्ती 

बात बात पर आती हंसी

दो रुपये का कुलचा खाना

एक दूसरे को बहुत चिढ़ाना

जाने कहाँ गए वो दिन। 

  महाविद्यालय विश्वविद्यालय में पढ़ने जाना

 रंग बिरंगे सपने सजाना

पूरा करने के लिए हर जोखिम उठाना 

बेपरवाह बिचरते जाना

जाने कहाँ गए वो दिन। 

नौकरी पेशे पर जाना

घर के लिए हर फर्ज निभाना

परिवार की जरूरतों का रखना ध्यान

बनी रहे उनकी मुस्कान

जाने कहाँ गए वो दिन। 

बुढ़ापे में कमजोर हुआ शरीर

कोई पूछता नहीं अब मेरा हाल

जिनके लिए कमाएं हज़ार लाख

वो नहीं अब मेरे साथ  

जाने कहाँ गए वो दिन। 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू



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