# नमन मंच 🙏🙏🙏
साहित्य संगम संस्थान तमिलनाडु इकाई
# दिन - शुक्रवार
# विषय - बीज मैं शब्दों के बोता हूँ
# विधा - कविता
बीज मै शब्दों के बोता हूँ
काव्य रूपी वृक्ष तभी उग पाता है
छाया उसकी देती सुख अपार
मिट जाते संसारिक ताप
फल मीठा मिठास है गोलता
कड़वे हुए विचारों पर
चित चेतना को जागृत करता
अपने अर्थ विचारों से
अंधविश्वासों का करता अंत
अपने नवीन विचारों से
शब्दों के बीज की शक्ति ऐसी
जो चीर दें फैले हुए अंधकारो को ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर ,जम्मू
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