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मंगलवार, 9 मार्च 2021

इंतजार

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंदी साहित्य संगम संस्थान पंजाब इकाई

# दिनांक - 10/03/2021

# दिन - बुधवार

# विषय - इंतज़ार

# विधा - स्वैच्छिक ( छंदमुक्त कविता) 

प्रियतम इंतज़ार में तेरे, 

नयन तरस रहे है, 

हर आंसू को पी रहे हैं, 

कब मेरी प्यास बुझाओगे, 

कब अपना दर्शन दिखाओगे । 

इंतज़ार में तेरे, 

भूख प्यास का कोई न ध्यान रहा, 

अब दुनिया से मेरा कोई न काम रहा, 

तेरे इश्क में रोई हूँ, 

तेरे ख्यालों में हमेशा खोई हूँ। 

अब तो कुछ  प्रीतम दया करो 

बिरहा के क्षणों को ,

अपने कोमल प्रेम का एहसास ही दो करा । 

 इंतज़ार में तेरे आंखों की रोशनी, 

अंधेरे में बदल गयी, 

हर आंसू को तेरा प्रेम रस मानकर पी गयी । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

 जम्मू कश्मीर, जम्मू





 


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