# नमन मंच 🙏🙏🙏
# हिंदी साहित्य संगम संस्थान पंजाब इकाई
# दिनांक - 10/03/2021
# दिन - बुधवार
# विषय - इंतज़ार
# विधा - स्वैच्छिक ( छंदमुक्त कविता)
प्रियतम इंतज़ार में तेरे,
नयन तरस रहे है,
हर आंसू को पी रहे हैं,
कब मेरी प्यास बुझाओगे,
कब अपना दर्शन दिखाओगे ।
इंतज़ार में तेरे,
भूख प्यास का कोई न ध्यान रहा,
अब दुनिया से मेरा कोई न काम रहा,
तेरे इश्क में रोई हूँ,
तेरे ख्यालों में हमेशा खोई हूँ।
अब तो कुछ प्रीतम दया करो
बिरहा के क्षणों को ,
अपने कोमल प्रेम का एहसास ही दो करा ।
इंतज़ार में तेरे आंखों की रोशनी,
अंधेरे में बदल गयी,
हर आंसू को तेरा प्रेम रस मानकर पी गयी ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर, जम्मू
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