# नमन मंच 🙏🙏🙏
# हिंददेश परिवार जम्मू कश्मीर
# दिनांक - 11/03/2021
# दिन - बृहस्पतिवार
# विषय - तमन्ना
# विधा - छंदमुक्त कविता
तमन्ना थी अक्षरों के शब्द बनाता,
ख्यालों की दुनिया में खो जाता।
आकाश की भरता उड़ान ,
बढ़ जाता मेरा भी कुछ मान।
कवि बनने की तमन्ना मन जागी,
बन गया मैं शब्दों का साथी।
सोचा था समाज की समाज कलम ✍ से करूँगा,
शब्दों के द्वारा दुख उनके हरूंगा ।
मेरी तमन्ना ने भर ली थी उड़ान ,
अब मैं बन ही जाऊँगा कवि महान।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर, जम्मू
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